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शौक़-ए-दिल हम ना-तवानों का लिखा जाता है कब
अब तलक आफी पहुँचने की अगर ताक़त हुई

When will the desires of our hearts, which are powerless, be written? If we had the strength to reach the shore of peace, by now.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

शौक़-ए-दिल हम ना-तवानों का लिखा जाता है कब, अब तलक आफी पहुँचने की अगर ताक़त हुई। (अर्थात्, हमारे दिल के ये अधूरे और कमजोर ख्वाहिशें कब पूरी होंगी, अगर हमें शांति के किनारे तक पहुंचने की ताकत मिल जाए।)

विस्तार

यह शेर दिल की चाहत और इंसान की कमज़ोरी के बीच के संघर्ष को दिखाता है। शायर सवाल करते हैं कि क्या ना-तवानों का दिल का शौक़ कभी लिखा जा सकता है? क्या अब तक महबूब तक पहुँचने की हिम्मत, क्या वो ताक़त बची है? यह इंसानी नज़ाकत और इश्क़ की गहराई पर एक गहरा फ़लसफ़ा है।

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