बनी न अपनी तो उस जंग-जू से हरगिज़ 'मीर'
लड़ाईं जब से हम आँखें लड़ाइयाँ देखीं
“Never, my lord, will I forsake that struggle, Since the day our eyes have exchanged battles.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थात, मैं उस संघर्ष को कभी नहीं छोडूंगा, जब से हमारी आँखों ने लड़ाइयों का अनुभव किया है।
विस्तार
यह शेर प्रेम के उस गहरे दर्द को बयां करता है, जहाँ इश्क़ भी एक जंग बन जाता है। शायर कह रहे हैं कि वो कभी भी उस भावनात्मक युद्ध के मैदान में वापस नहीं जाएंगे.... क्योंकि उन्होंने आँखों में वो दर्द देखा है, जो किसी लड़ाई से कम नहीं है। यह एक बहुत ही गहरा और मार्मिक एहसास है।
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