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तस्वीर के से ताइर ख़ामोश रहते हैं हम
जी कुछ उचट गया है अब नाला ओ फ़ुग़ाँ से

Like a picture, we remain silent now, For something has been taken from the sorrowful stream.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तस्वीर की तरह हम खामोश रहते हैं, क्योंकि नाला ओ फुआँ से कुछ उचट गया है।

विस्तार

ये शेर एक बहुत ही गहरा एहसास बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि वे तस्वीरों से दूर, ख़ामोश पंछियों की तरह रहते हैं। और दूसरा मिसरा... यह तो ग़म के नाले से सवाल कर रहा है। मानो कह रहा हो कि अरे! यह जो ग़म का सैलाब था, यह कहाँ चला गया? यह एक सुकून भरी उदासी है, जब दर्द चरम पर नहीं होता।

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