आँखों ही में रहे हो दिल से नहीं गए हो
हैरान हूँ ये शोख़ी आई तुम्हें कहाँ से
“You remain only in my eyes, you haven't left my heart; I wonder where this playful behavior came from you.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आप मेरी आँखों में तो बस रहे हो, दिल से नहीं गए; यह शोख़ी तुम्हें कहाँ से आई, मैं हैरान हूँ।
विस्तार
यह शेर दिल और आँखों के बीच के फासले को बयान करता है। शायर कहते हैं कि महबूब ने दिल तो छोड़ा नहीं, लेकिन सिर्फ आँखों में रहना सीख लिया है। यह कैसी शोख़ी है? यह उलझन, यह सवाल... कि आप कहाँ से ये नज़रों का जादू लेकर आए! यह एक बहुत ही गहरा दर्द है जो बताता है कि कभी-कभी एहसास, बस देखने तक सीमित रह जाते हैं।
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