बद-गुमानी है जिस से तिस से आह
क़स्द-ए-शोर-ओ-फ़साद है हम को
“The one from whom the suspicion arises, and from whom the desire for noise and chaos comes to us.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिस व्यक्ति से मन में गलत धारणाएँ या शक पैदा होता है, और जिससे हमें शोरगुल और फसाद करने की इच्छा होती है।
विस्तार
यह शेर शक की उस भयानक ताकत को बयां करता है, जो इंसान को अंदर से तोड़ देती है। शायर कहते हैं कि बद-गुमानी का ज़हर इतना गहरा होता है कि वह हमें खुद ही अशांति और फ़साद की तरफ धकेल देता है। यह सिर्फ़ किसी और पर शक नहीं है, बल्कि यह हमारे अपने मन का वह अंधेरा कोना है, जो हमें तबाही की तरफ ले जाता है।
