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तलवार के साए ही में काटे है तो ऐ 'मीर'
किस दिल-ज़दा को हुए है ये ज़ौक़ फ़ना का

If you have been separated from the shadow of the sword, O 'Mir', Which lover has found this taste of annihilation?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यदि तुम तलवार की छाया में काटा गया है, हे 'मीर', तो किस प्रेमी को विलोपन का यह स्वाद प्राप्त हुआ है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने अस्तित्व के विरोधाभास को दर्शाया है। 'तलवार का साया' जीवन के संघर्ष, खतरे या अशांति को दिखाता है। शायर पूछते हैं: अगर आप लगातार ऐसे ख़तरे में जी रहे हैं, तो किस आशिक़ को विस्मृति या मिट जाने का ज़ायका (ज़ौक़) आ गया? यह बताता है कि ज़िंदगी का दर्द हमें एक तरह के सुकून, एक पलायन की चाहत कराता है।

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