हाथ आईना-रूयों से उठा बैठें न क्यूँकर
बिल-अकस असर पाते थे हम अपनी दुआ का
“Why do you rise from the mirrors of your hands, my dear? Our prayers once held such magic.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हाथों के आईने-रूयों से उठकर बैठना क्यों, मेरे प्रिय? हमारी दुआ का असर पहले कितना कमाल का था।
विस्तार
यह शेर दिल के गहरे एहसास और उम्मीदों के नाजुक धागों पर बात करता है। शायर पूछते हैं कि हमें अपने ख़्यालों के आईने से उठकर बैठना क्यों चाहिए, जब कभी हमारी अपनी दुआओं का असर ही काफी था? इसका मतलब है कि सच्चा सहारा और ताकत बाहर की नज़रों या दिखावे में नहीं होती, बल्कि दिल की अपनी इबादत और यकीन में होती है।
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