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जो है सो पाएमाल-ए-ग़म है 'मीर'
चाल बे-डोल है ज़माने की

The sorrow's treasure is what one can attain, O Meer, The world's fashion is unsteady, a shifting stream.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जो कुछ है, वह गम का खजाना है, ऐ मीर। ज़माने की चाल अस्थिर है।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की बेड़चारगी और अनिश्चितता के बारे में बताता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि जो ग़म हमें होता है, वो बस दुनिया का खिलौना है। दुनिया का चलना, उसका व्यवहार, कभी एक जैसा नहीं रहता। यह हमें समझाता है कि जीवन की कोई भी बात पक्की नहीं होती.... हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए, क्योंकि हालात कभी भी बदल सकते हैं!

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