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बेकली उस की न ज़ाहिर थी जो तू ऐ बुलबुल
दमकश-ए-'मीर' हुई उस लब ओ गुफ़्तार के साथ

That beauty of hers was not apparent, O Nightingale, even with the splendor of 'Mir's' lips and speech.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे बुलबुल, उसकी सुंदरता वैसी नहीं थी जो मीर के होंठ और वाणी की चमक से प्रकट हो।

विस्तार

यह शेर महबूब के रहस्यमय स्वभाव को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि उस महबूब की असलियत, उसकी बेकली, शुरुआत में नज़र नहीं आ रही थी। लेकिन, वह असलियत तब सामने आई, जब शायर ने उसके होंठों और उसकी बातों में एक जादू देखा। यानी, कभी-कभी सबसे गहरे सच.... सबसे साधारण बातों में छिपे होते हैं।

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