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कौन से ये बहर-ए-ख़ूबी की परेशाँ ज़ुल्फ़ है
आती है आँखों में मेरी मौज दरिया-आश्ना

What are these tresses, troubled by the beauty's current, That come into my eyes, a wave, a familiar river?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ये कौन सी सुंदर लहरों से उलझी हुई ज़ुल्फ़ें हैं, जो मेरी आँखों में एक परिचित नदी की तरह आती हैं।

विस्तार

यह शेर महबूब की बहुत ख़ूबसूरत तारीफ़ है। शायर यहाँ पूछते हैं कि ये कौन सी नाज़ुक, उलझी हुई ज़ुल्फ़ें हैं। वो उनकी ज़ुल्फ़ों की तुलना किसी ऐसे दरिया की लहरों से करते हैं जो बहुत ही अपना और परिचित हो। इसका मतलब है कि उनकी खूबसूरती इतनी असरदार है कि वो दिल और आँखों में एक लहर की तरह हमेशा उमड़ती रहती है।

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