गुल ने हज़ार रंग-ए-सुख़न सर किया वले
दिल से गईं न बातें तिरी प्यारी प्यारियाँ
“The rose has adorned its head with a thousand colors of poetry, Yet your dear talks never left my heart, my beloved.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
गुल ने हज़ार रंग-ए-सुख़न सर किया वले। दिल से गईं न बातें तिरी प्यारी प्यारियाँ।
विस्तार
यह शेर हमें जीवन के एक गहरे सच से रूबरू कराता है। शायर कह रहे हैं कि दुनिया कितनी भी रंगीन, कितनी भी शोरगुल से भरी क्यों न हो—'गुल ने हज़ार रंग-ए-सुख़न सर किया वले'—लेकिन दिल के किसी कोने में, महबूब की यादें हमेशा ताज़ा रहती हैं। यह बताती है कि बाहरी दुनिया का शोर, कभी भी हमारे दिल की मीठी धुन पर भारी नहीं पड़ सकता।
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