Sukhan AI
ख़ूँ बस्ता न क्यूँ पलकें हर लहज़ा रहीं मेरी
जाते नहीं आँखों से लब-ए-यार के उन्नाबी

Why does my blood not settle, my eyelids are restless, every phrase remains mine, They do not leave my eyes, the beloved's captivating lips.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरा रक्त क्यों नहीं थमता, मेरी पलकें क्यों बेचैन हैं, हर लफ़्ज़ मेरा ही क्यों है। वे आँखों से नहीं जाते, महबूब के मनमोहक होंठों के।

विस्तार

यह शेर उस बेचैनी को बयां करता है जो इश्क़ में होती है। शायर कह रहे हैं कि मेरी पलकें क्यों नहीं थकतीं, क्योंकि महबूब के होंठों की महक... उनकी यादें मेरी आँखों से जाती नहीं हैं। यह एक ऐसी बेचैनी है, जो आपको नींद नहीं लेने देती। यह दिखाता है कि मोहब्बत सिर्फ दिल में नहीं, बल्कि हर नज़र, हर सांस में बस जाती है। कितना गहरा एहसास है!

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