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ज़ालिम ज़मीं से लौटता दामन उठा के चल
होगा कमीं में हाथ किसू दाद-ख़्वाह का

From the cruel earth, I leave, carrying my empty hands, In the depths of sorrow, whose love will guide my path?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ज़ालिम ज़मीं से मैं दामन उठाकर लौट रहा हूँ, और इस गहरे दुःख में मेरे मार्ग को कौन सा प्रेम निर्देशित करेगा।

विस्तार

यह शेर हिम्मत और सच्चे प्यार की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब हमें कोई मुश्किल ज़मीन छोड़कर जाना पड़े, तब भी हमें यह भरोसा है कि कमी के समय में भी, किसी सच्चे आशिक़ का हाथ मिल जाएगा। यह उम्मीद का पैगाम है कि वफ़ा कभी कम नहीं होती।

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पाठ
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