ढूँडा न पाइए जो इस वक़्त में सौ ज़र है
फिर चाह जिस की मुतलक़ है ही नहीं हुनर है
“I cannot find a hundred gold coins at this moment, Nor is there any skill for the love that is absolute.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
इस वक़्त में सौ ज़र ढूँढना मुमकिन नहीं, और न ही ऐसा हुनर है कि वह चाहत हासिल की जा सके जो मुतलक़ हो।
विस्तार
यह शेर आज के दौर के नज़ारों पर एक गहरा तंज़ है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि अगर इस वक़्त में सौ ज़र (सोने के सिक्के) मिलना भी मुश्किल हो गया है, तो फिर उस इश्क़ की चाहत... जिसकी कोई मुत़लक़ हुनर (स्थायी कला) ही नहीं, उसे पाना या निभाना कैसा? यह भौतिक और रूहानी दोनों चीज़ों की अस्थिरता को बयां करता है।
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