नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ाँ है
टहनी जो ज़र्द भी है सो शाख़-ए-ज़ाफ़राँ है
“The charm of the garden is the same, be it from the nightingale or the autumn; the branch that is yellow is the bough of saffron.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बाग का नज़ाकत वही है, चाहे वह बुलबुल से आए या पतझड़ से; जो टहनी पीली है, वह केसर की शाख़ है।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी के एक गहरे सच से रूबरू कराता है। शायर कहते हैं कि किसी चीज़ की असली नज़ाकत.... या उसका असली रंग.... मौसम या हालात देखकर नहीं पता चलता। चाहे वो पतझड़ हो.... या बुलबुल का मीठा गाना.... सुंदरता तो वही है! और जैसे ज़र्द तिनके में भी केसर का रंग छिपा है.... वैसे ही हर मुश्किल में एक अनमोल ख़ूबसूरती छिपी होती है।
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