आह उन ख़ुश-क़ामतों को क्यूँके बर में लाइए
जिन के हाथों से क़यामत पर भी अर्सा-ए-तंग है
“Ah, why bring those who are happy-hearted to the rainy season, Whose hands hold even the eternity of the Day of Judgment.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कहता है कि उन ख़ुश-क़ामतों को वर्षा में क्यों लाया जाए, जिनके हाथों में क़यामत के दिन का भी लंबा समय है।
विस्तार
यह शेर अस्तित्व के समय पर एक गहरा सवाल उठाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछते हैं, 'उन ख़ुश-क़ामतों को क्यूँके बर में लाइए?' वो कहते हैं कि ख़ुशी और संतोष भी एक बोझ है। मानो, क़यामत के दिन भी, जहाँ सब कुछ ठहर जाएगा, उन लोगों की ख़ुशी ही एक तरह का तंग एहसास है। यह जीवन की विडंबना है।
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