दीवार कोहना है ये मत बैठ उस के साए
उठ चल कि आसमाँ तो का वाक हो गया है
“Do not sit in the shadow of the wall; rise up, for the sky has already become a promise.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दीवार की छाया में मत बैठो; उठो, क्योंकि आसमाँ तो वादे का हुआ है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ एक दीवार की बात नहीं करता, बल्कि जीवन की उस उलझन को बयां करता है, जब हम किसी अस्थायी सहारे या पुरानी आदत में फँस जाते हैं। शायर कहते हैं कि उस टूटी हुई चीज़ की परछाई में मत बैठना। उठो, क्योंकि आसमान... वो तो हमसे बात कर रहा है! यह एक प्रेरणा है कि हमें अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना होगा और ज़िंदगी की पुकार को सुनना होगा।
