मुक़ामिर-ख़ाना-ए-आफ़ाक़ वो है
कि जो आया है याँ कुछ खो गया है
“The gathering place of the horizons is that place, Where whoever has come has lost something.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आفاقों का मुक़ामिर-ख़ाना वो जगह है, जहाँ जो भी आता है, कुछ न कुछ खो जाता है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की नश्वरता और खो जाने वाली चीज़ों पर एक गहरा विचार है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि यह दुनिया, यह 'आफ़ाक़ों का मुक़ामिर-ख़ाना' ही है, कि जो कुछ भी इसमें आता है, वह कुछ न कुछ खोकर जाता है। यह जीवन के गुजर जाने और यादों की धुंधली पड़ जाने का एक खूबसूरत एहसास है।
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