क्या क्या 'अज़ीज़ दोस्त मिले 'मीर' ख़ाक में
नादान याँ कसो का कसो को भी ग़म हुआ
“What treasures of friends did I find, O Mir, in this dust? Even the simple, innocent sorrow found in this place.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मीर कहते हैं कि इस ख़ाक में मुझे किस-किस तरह के अजीज़ दोस्त मिले। यहाँ के नादान माहौल में तो साधारण सा दुःख भी मिल गया।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की नश्वरता और रिश्तों की सच्चाई को बयां करता है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जीवन की धूल-मिट्टी में भी हमें ऐसे दोस्त मिले जो अनमोल थे। लेकिन दिल का दर्द इतना गहरा होता है कि यह केवल अपने तक सीमित नहीं रहता। यह नादान दिल हर किसी का ग़म महसूस करता है, चाहे वह कितना भी दूर क्यों न हो।
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