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ख़ाना-ख़राब किस का किया तेरी चश्म ने
था कौन यूँ जिसे तू नसीब एक दम हुआ

Whose home did your eyes ruin? Who was it that was once unattainable, and now has become your destiny?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तेरे नैनों ने किस का घर खराब किया? जिसे पहले कोई नसीब नहीं था, वो आज तेरा नसीब बन गया।

विस्तार

यह शेर उस नशीली और तबाही मचाने वाली निगाह की बात करता है। शायर पूछ रहे हैं कि आपकी आँखों ने किसका घर उजाड़ दिया? यह सवाल किसी बाहरी नुक़सान का नहीं है, बल्कि यह दिल के टूटने का दर्द है। यह बताता है कि महबूब की एक झलक, एक पल का नज़ारा, पूरी ज़िंदगी को कैसे तहस-नहस कर सकता है। क्या कोई महफ़िल इस दर्द को समझ सकती है?

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