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अब तो दिल को न ताब है न क़रार
याद-ए-अय्याम जब तहम्मुल था

Now the heart has neither resolve nor peace, / When the memory of days was bearable.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अब तो दिल को न ताब है न क़रार, याद-ए-अय्याम जब तहम्मुल था। इसका अर्थ है कि अब मन में न तो हिम्मत है और न ही शांति, जबकि पहले बीते हुए दिनों को सहना संभव था।

विस्तार

यह शेर यादों के बोझ को बहुत खूबसूरती से बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि अब उनके दिल में न तो कोई उत्साह है और न ही कोई शांति। वो कहते हैं कि जब भी वो बीते हुए दिनों को याद करते थे, तब उनमें एक तरह का सहना, एक हिम्मत थी। लेकिन अब वो हिम्मत चली गई है।

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