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आगे जमाल-ए-यार के मा'ज़ूर हो गया
गुल इक चमन में दीदा-ए-बेनूर हो गया

The beauty of the beloved has become an excuse, The rose in the garden has become the sight of the eye.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

आगे जमाल-ए-यार के मा'ज़ूर हो गया गुल इक चमन में दीदा-ए-बेनूर हो गया (अर्थात, प्रियतम के सौंदर्य का बहाना/कारण खत्म हो गया है, और अब बगीचे में फूल को आँखों का नज़ारा बन गया है।)

विस्तार

यह शेर माशूक़ की खूबसूरती के उस जादू को बयान करता है, जो हर चीज़ को फीका कर देता है। शायर कहते हैं कि महबूब का जमाल इतना असरदार है कि वह हर चीज़ का बहाना बन गया है। जब कोई चीज़ इतनी खूबसूरत हो, तो एक पूरा बाग़, उसमें खिले फूल भी... बस एक साधारण नज़ारा बनकर रह जाते हैं।

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पाठ
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