दिल-ए-बे-क़रार गिर्या-ए-ख़ूनीं था रात 'मीर'
आया नज़र तो बिस्मिल दर-ए-ख़ूँ तपीदा था
“The heart, restless and grieving, was like a bloody tear at night, 'Mir' But when I saw you, the door of the beloved was alight.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बेचैन और दुखी दिल रात में खून के आँसू जैसा था, 'मीर'। पर जब मैंने तुम्हें देखा, तो महबूब के दरवाज़े जगमगा रहे थे।
विस्तार
यह शेर गहरे भावनात्मक उथल-पुथल को बयान करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि रात के अँधेरे में उनका बेचैन दिल खून के आँसू बहा रहा था। और जब उन्होंने देखा... तो वह खून से सना हुआ दहलीज (दर-ए-ख़ूँ) था। इसका मतलब है कि किसी दर्दनाक सच्चाई का बस सामने आ जाना ही इंसान को इतना तोड़ देता है कि वो आँसू भी खून जैसे लगते हैं।
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