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ऐ गुल‌‌‌‌-ए-नौ-दमीदा के मानिंद
है तू किस आफ़रीदा के मानिंद

Like the newly bloomed rose, O you, Whose creator is this, I cannot know.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐ नौ-दमिया के फूल के समान, तुम किस रचयिता के समान हो।

विस्तार

यह शेर केवल तारीफ नहीं है, बल्कि एक गहरा सवाल है! शायर यहाँ महबूब की सुंदरता के स्रोत पर सवाल उठा रहे हैं। 'गुल-ए-नौ-देदा' एक परिकल्पित, अद्भुत फूल है। जब शायर पूछते हैं कि तुम किस 'आफ़रीदा' की मानिंद हो, तो वह कह रहे हैं कि तुम्हारी खूबसूरती इतनी लाजवाब है कि यह किसी साधारण दुनिया की रचना नहीं हो सकती। यह एक नजाकत भरा इज़हार-ए-इश्क़ है।

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