क्यूँ न देखूँ चमन को हसरत से
आशियाँ था मिरा भी याँ पर-साल
“Why shouldn't I gaze upon the garden with longing, My nest was also here, for years.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं इस बगीचे को चाहत से क्यों न देखूँ, मेरा घोंसला भी यहाँ वर्षों पहले था।
विस्तार
यह शेर न सिर्फ़ एक जगह की बात करता है, बल्कि यादों की बात करता है। शायर पूछ रहे हैं कि मैं इस चमन को हसरत से क्यों न देखूँ? क्योंकि ये आशियाँ, ये सुकून... ये तो कभी मेरा भी था! यह एहसास बहुत गहरा है कि हम किसी चीज़ से जुड़े होते हैं, भले ही वो चीज़ अब हमारे पास न हो। यह एक मीठा दर्द है, जो हमें अपने गुज़रे हुए वक़्त की याद दिलाता है।
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