न तुझे रहम ने उसे टुक सब्र
दिल पे मेरे अजब मुसीबत है
“Neither mercy nor patience was enough for you, It is a strange calamity upon my heart.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
न तुझे रहम ने उसे टुक सब्र, दिल पे मेरे अजब मुसीबत है। इसका शाब्दिक अर्थ है कि न दया से न धैर्य से उसे कुछ नहीं हुआ, और यह मेरे दिल पर एक अजीब मुसीबत है।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है जो मोहब्बत में होता है। शायर कह रहे हैं कि न आपको किसी तरह की मेहरबानी मिली है, और न ही आपको थोड़े से सब्र का सहारा मिला है। यह तकलीफ बाहर से नहीं है, बल्कि उनके दिल में एक अजब सी मुसीबत बन गई है। यह आशिक़ की उस लाचारी को दिखाता है, जो महबूब की रहमत पर टिकी होती है।
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