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ग़ज़ल

दरिया में चाँदनी की शोभा

دریا میں چاندنی کا حسن
नर्मद· Ghazal· 3 shers

यह ग़ज़ल समुद्र में चाँदनी की सुंदरता का वर्णन करती है। चाँदनी अपनी शीतल और मधुर आभा से पानी पर बिखर जाती है, जिससे लहरें धीरे-धीरे हिलती हैं और मनमोहक दृश्य बनता है। यह रात के शांत और मनमोहक वातावरण को दर्शाता है।

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1
(રેખતો) આહા પૂરી ખીલી ચંદા, શીતળ માધુરી છે સુખકંદા. આહાo
आहा, चाँद पूरी तरह खिल गया है। उसकी शीतल मधुरता सुख का स्रोत है।
2
પાણી પર તે રહી પસરી રૂડી આવે લેહર મંદા. આહાo૧ શશીલીટી રૂડી ચળકે, વળી હીલે તે આનંદા. આહાoર
पानी पर वह फैलकर सुंदर मंद लहरें आती हैं। सुंदर चाँद की किरणें चमकती हैं, और वह खुशी से झूलती है।
3
ઊંચે ભૂરૂં દીપે આસમાન, વચે ચંદા તે સ્વછંદા. આહાo૩ નીચે ગોરી ઠારે નેનાં, રસે ડૂબ્યા નરમદ બંદા. આહાo૪
ऊपर नीला आकाश चमकता है, जिसमें चंद्रमा स्वच्छंद रूप से दीप्त है। नीचे एक गोरी स्त्री आँखों को ठंडक पहुंचाती है, और नर्मद, उसका सेवक, उसके प्रेम में डूबा हुआ है।
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