જો ઊંચે ચિદ તેજ, તેજ સુખ હશે પોતે.
“If the supreme consciousness is light, that light itself will be bliss.”
— नर्मद
अर्थ
यदि सर्वोच्च चेतना प्रकाश है, तो वह प्रकाश स्वयं ही आनंद होगा।
विस्तार
यह सुंदर पंक्ति हमें बताती है कि यदि हमारी आंतरिक चेतना, हमारी आध्यात्मिक ज्योति ऊँचे स्तर पर प्रकाशित होती है, तो वही प्रकाश अपने आप में सुख है। इसका अर्थ है कि सच्चा आनंद बाहर से नहीं मिलता, बल्कि यह एक उन्नत और जागरूक मन का स्वाभाविक गुण है। जब हम अपने भीतर के उस तेजस्वी स्वरूप से जुड़ते हैं, तो हम पाते हैं कि परम सुख कोई गंतव्य नहीं, बल्कि स्वयं वह प्रकाश ही है। यह हमें याद दिलाता है कि वास्तविक खुशी भीतर से आती है, हमारी अपनी प्रबुद्ध जागरूकता से।
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