“I said, 'Stricken with yearning, your lover Nazm dies in despair;' / She replied, 'If he should die, what loss is that for me to bear?'”
मैंने कहा कि नज़्म तुम्हारी चाहत और हसरत में मरा जा रहा है, तो उसने कहा कि अगर वह मर भी जाए तो इसमें मेरा क्या नुकसान है।
यह शेर महबूब की बेरुखी और आशिक़ की बेबसी की एक दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। आशिक़ अपनी तड़प और हसरत का वास्ता देकर महबूब के दिल में रहम जगाने की कोशिश करता है कि वह उसके ग़म में घुट-घुट कर मर रहा है। मगर महबूब निहायत बेपरवाही से जवाब देता है कि अगर वह मर भी जाए, तो उसका क्या नुकसान होगा। यह एकतरफ़ा इश्क़ का वह कड़वा सच है जहाँ एक इंसान की पूरी ज़िंदगी दूसरे के लिए महज़ बेमानी होकर रह जाती है।
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