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ग़ज़ल

আকাশ ভরা সূর্য তারা

آسمان سورج اور ستاروں سے بھرا

यह ग़ज़ल कवि के उस गहरे विस्मय को व्यक्त करती है जिसमें उन्हें सूर्य, तारों और जीवन से भरे विशाल ब्रह्मांड में अपनी जगह मिलती है। यह ईश्वर के अनंत ब्रह्मांडीय खेल पर चिंतन करती है, जो असीम होते हुए भी सीमित संसार में अपनी अनूठी धुन बजाता है।

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1
আকাশ ভরা সূর্য তারা, বিশ্ব ভরা প্রাণ, তাহার মাঝে আমি পেয়েছি মোর স্থান—
आकाश सूर्य और तारों से भरा है, विश्व प्राणों से भरा है, और इन सबके बीच मैंने अपना स्थान पाया है।
2
বিস্ময়ে তাই জাগে আমার গান॥ অসীম কালে কত খেলা যে খেলেছ একা একা,
इसलिए विस्मय में मेरा गीत जाग उठता है। अनंत काल में तुमने अकेले ही कितने खेल खेले हैं।
3
কত রঙে কত ছন্দে কত সুরে বাঁধা রেখা— সীমার মাঝে অসীম তুমি বাজাও আপন তান॥
अनगिनत रंगों, छंदों और सुरों में रेखाएँ बंधी हैं। सीमाओं के भीतर, तुम जो असीम हो, अपनी धुन बजाते हो।
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