ग़ज़ल
আমার মাথা নত করে দাও হে
اے میرا سر جھکا دو
यह ग़ज़ल विनम्रता और आत्म-त्याग की गहरी इच्छा व्यक्त करती है, जिसमें व्यक्ति अपने अहंकार को अश्रु में डुबोकर मिटाने का आग्रह करता है। वक्ता अपनी आत्म-महत्व की भावना को भूलना चाहता है और अपने कार्यों व जीवन को एक उच्च इच्छा एवं प्रेम के प्रति समर्पित करके सच्चा अर्थ प्राप्त करना चाहता है।
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1
আমার মাথা নত করে দাও হে তোমার চরণ-ধূলার তলে।
সকল অহংকার হে আমার ডুবাও চোখের জলে॥
हे प्रभु, मेरा सिर तुम्हारे चरणों की धूल में झुका दो। मेरे सारे अभिमान को मेरी आँखों के आँसुओं में डुबो दो।
2
নিজেরে করিতে গৌরব দান নিজেরে কেবলই ভাবি,
এই নিমেষে সেই বুদ্ধি দাও যাতে ভুলি আপনারে॥
मैं हमेशा खुद को महिमा प्रदान करने के लिए खुद के बारे में ही सोचता रहता हूँ। इस क्षण में मुझे वह बुद्धि दो जिससे मैं खुद को भूल जाऊँ।
3
সকল কাজে তোমার ইচ্ছা করো হে পূর্ণ সাথী,
আমার এই জীবন করো হে সার্থক তোমার প্রীতি॥
हे मेरे पूर्ण साथी, मेरे सभी कार्यों में अपनी इच्छा को पूरा करो। मेरे इस जीवन को अपनी प्रीति से सफल बनाओ।
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