“কী আঁচল বিছায়েছ বটের মূলে, নদীর কূলে কূলে। মা, তোর মুখের বাণী আমার কানে লাগে সুধার মতো॥”
बरगद के मूल में और नदी के किनारों पर क्या आँचल बिछाया है। माँ, तेरे मुख की वाणी मेरे कानों को अमृत समान लगती है।
यह खूबसूरत दोहा प्रकृति की शांत सुंदरता और एक माँ की सांत्वनापूर्ण उपस्थिति की तुलना करता है। यह उस 'आँचल' या फैलाव की बात करता है जो बरगद के पेड़ के नीचे और नदी के किनारे बिछा हुआ है, जो प्रकृति के पोषणकारी आलिंगन का सुझाव देता है। फिर, यह सीधे 'माँ' को संबोधित करता है, यह व्यक्त करते हुए कि उनके मुख से निकले शब्द सुनने वाले के कानों को अमृत के समान मधुर लगते हैं। यह माँ की आवाज़ में पाई जाने वाली गहरी शांति और अत्यधिक मिठास को खूबसूरती से दर्शाता है, इसे सबसे सुखद और आनंदमय अनुभवों के बराबर बताता है, ठीक प्रकृति की कोमल सुंदरता की तरह।
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