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যদি আলো না ধরে, ওরে ওরে ও অভাগা,
যদি ঝড়-বাদলে আঁধার রাতে দুয়ার দেয় ঘরে—

যদি আলো না ধরে, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি ঝড়-বাদলে আঁধার রাতে দুয়ার দেয় ঘরে—

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

हे अभागे, यदि प्रकाश न हो, और यदि तूफ़ान-बारिश वाली अँधेरी रात में घर का दरवाज़ा टूट जाए—

विस्तार

यह दोहा एक मार्मिक तस्वीर पेश करता है, जो गहरे दुर्भाग्य का सामना कर रहे किसी व्यक्ति से बात करता है। कल्पना कीजिए एक अँधेरी, तूफानी रात जब आपको मार्गदर्शन के लिए कोई प्रकाश न हो, और हवा तथा बारिश इतनी तेज़ हों कि आपका दरवाज़ा टूट जाए। यह पूरी तरह से असहाय महसूस करने और तब अभिभूत होने की भावना को खूबसूरती से दर्शाता है, जब चुनौतियाँ आपके जीवन में आ गिरती हैं, और आपको अँधेरे में छोड़ जाती हैं। यह एक शक्तिशाली अनुस्मारक है कि कठिन समय कितना अकेला और डरावना लग सकता है, जो हमें गहन संघर्षों और तब आवश्यक लचीलेपन को स्वीकार करने का आग्रह करता है जब आशा दूर लगती है।

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