Sukhan AI
রাশি রাশি ভারা ভারা ধান কাটা হয়েছে,
কে নিবে, কে নিবে, মোর সোনার ধান॥

রাশি রাশি ভারা ভারা ধান কাটা হয়েছে, কে নিবে, কে নিবে, মোর সোনার ধান॥

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

ढेरों-ढेर, बोरियों-भर धान काट लिया गया है। कौन लेगा, कौन लेगा, मेरा सुनहरा धान?

विस्तार

यह पंक्तियाँ रवींद्रनाथ टैगोर की कविता 'सोनार तरी' से ली गई हैं। इनमें एक किसान की दुविधा को दर्शाया गया है। कल्पना कीजिए कि ढेर सारा, अथाह सुनहरे धान काट लिया गया है। इतनी प्रचुरता को देखकर वक्ता पूछता है, 'कौन लेगा, कौन लेगा, मेरे इस सुनहरे धान को?' यह रचना या उपलब्धि के आनंद को खूबसूरती से दर्शाता है, जिसके तुरंत बाद इसे संरक्षित करने या इसके मूल्य को पहचानने और आगे ले जाने वाले व्यक्ति को खोजने की चिंता होती है। यह जीवन के प्रयासों की क्षणभंगुर प्रकृति और उन्हें अमर बनाने की इच्छा का मार्मिक प्रतिबिंब है।

ऑडियो

पाठIn app
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.