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Where the clear stream of reason has not lost its way
Into the dreary desert sand of dead habit;

Where the clear stream of reason has not lost its way Into the dreary desert sand of dead habit;

रवींद्रनाथ टैगोर
अर्थ

यह उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ तर्क और विवेक की स्पष्ट धारा, पुरानी और निरर्थक आदतों के उबाऊ रेगिस्तान में भटक कर खत्म नहीं हुई है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए रूढ़ियों से ऊपर उठना चाहिए।

विस्तार

यह पंक्ति हमें अपने लिए सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है! यह हमें एक ऐसी जगह में रहने के लिए कहती है जहाँ हमारी स्पष्ट, तार्किक सोच और समझ पुरानी, ​​निष्क्रिय आदतों या परंपराओं में न खो जाए, जो अब किसी काम की नहीं हैं। कल्पना कीजिए आपका मन एक बहती हुई नदी जैसा है, हमेशा ताजा और स्पष्ट। कवि उम्मीद करता है कि यह नदी पुरानी, ​​बेजान आदतों के शुष्क रेगिस्तान में न खो जाए, जहाँ नए विचार पनप नहीं सकते। यह हमें अपने दिमाग को सक्रिय, प्रश्नशील और स्वतंत्र रखने का निमंत्रण है, बजाय इसके कि हम आँख बंद करके वही करें जो हमेशा से होता आया है। इस तरह, हमारी तर्कशक्ति तेज बनी रहती है और हमें आगे बढ़ाती है।

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