“Do not ask us how we are, we are pigeons in your sky.”
आप हमसे यह मत पूछिए कि हम कैसे हैं, हम आपके आकाश में कबूतर हैं।
यह खूबसूरत दोहा हमें यह सवाल न पूछने को कहता है कि बोलने वाले का स्वभाव कैसा है। वे कहते हैं, 'हमें यह मत पूछो कि हम कैसे हैं, क्योंकि हम तुम्हारे आकाश में कबूतरों जैसे हैं।' यह अपनेपन और स्वतंत्रता की एक गहरी घोषणा है। कल्पना कीजिए एक ऐसे आकाश की जो आपका है; उसमें ये कबूतर आज़ादी से, स्वाभाविक रूप से उड़ते हैं, बिना किसी अनुमति या स्पष्टीकरण की आवश्यकता के। वे बस वहीं हैं, आपकी दुनिया का एक हिस्सा, उसमें अपनी जगह और खुशी पाते हुए। यह एक गहरे, स्वाभाविक संबंध की बात करता है, जहाँ उनकी उपस्थिति उतनी ही स्वाभाविक और निर्विवाद है जितनी खुले आसमान में पक्षियों की।
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