ભટકી ભટકીને મારા થાકયા છે પાય
હવે પંથ મારો ચાલે તો ચાલુ:
“My feet are weary from their constant straying,If now my path proceeds, then I will walk.”
— सुरेश दलाल
अर्थ
भटक-भटक कर मेरे पैर थक गए हैं। अब यदि मेरा मार्ग आगे बढ़ेगा, तो मैं चलूँगा।
विस्तार
यह दोहा एक गहरी थकान और समर्पण की भावना को बहुत खूबसूरती से व्यक्त करता है। इसमें कवि कहते हैं कि भटक-भटक कर उनके पैर थक गए हैं। उन्होंने बहुत खोजबीन की है, बहुत यात्राएं की हैं, जिससे वे अब पूरी तरह से थक चुके हैं। अब उनकी इच्छा है कि उनका रास्ता खुद चले, जैसे नियति उन्हें आगे बढ़ाए। यह बताता है कि उन्होंने अपने स्तर पर सब कुछ कर लिया है, और अब वे चाहते हैं कि जीवन का मार्ग उन्हें अपने आप आगे ले जाए, ताकि वे बस उसके साथ चल सकें।
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