“My friend longs to hear Madhav's honey-sweet name from my lips; Do not let Radha's name flow in your flute's melody, Ghanashyam!”
मेरी सहेली माधव का मधुर नाम मेरे मुख से सुनना चाहती है; इसलिए, घनश्याम, आप अपनी बाँसुरी की धुन में राधा का नाम न बहने दें।
यह दोहा एक भक्त की गहरी इच्छा को दर्शाता है। वह अपने प्रिय कृष्ण के मधुर नाम 'माधव' को अपने ही होठों से प्यार से जपना चाहती है। यह एक बहुत ही व्यक्तिगत और कोमल प्रार्थना है, जो उसके गहरे स्नेह को दिखाती है। फिर वह सीधे कृष्ण को 'घनश्याम' कहकर संबोधित करती है और एक विनम्र अनुरोध करती है: वह उनसे कहती है कि वे अपनी बाँसुरी की धुन में राधा का नाम न बजाएँ। यह अनन्य प्रेम की एक लालसा व्यक्त करता है, जहाँ वह चाहती है कि वह ही उनकी भक्ति और संगीत की अभिव्यक्ति का एकमात्र केंद्र हो, वह अपने प्रेम को सबसे बढ़कर सँवारना चाहती है।
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