“This is a great flaw within me, O Akbar: whatever strikes my heart, I speak without restraint.”
'अकबर' कहते हैं कि मुझ में यह एक बड़ा ऐब या कमी है कि जो बात भी मेरे दिल में आती है, मैं उसे बिना किसी हिचकिचाहट के कह देता हूँ।
अकबर इलाहाबादी यहाँ बड़े ही चुटीले और सादे अंदाज़ में अपनी बेबाक साफ़गोई को अपनी सबसे बड़ी 'कमज़ोरी' बता रहे हैं। दुनिया अक्सर दिखावे और तसल्लियों के पर्दे में जीती है, इसलिए जो दिल में आए उसे बिना लाग-लपेट के कह देना ज़माने की नज़र में एक खता बन जाता है। इस ख़ूबसूरत तंज़ के ज़रिए शायर दरअसल यह समझा रहे हैं कि बिना किसी मुखौटे के सच बोलना ही इंसान का सबसे सच्चा और बेदाग़ रूप है।
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