हज़रत-ए-'अकबर' के इस्तिक़्लाल का हूँ मो'तरिफ़ ता-ब-मर्ग उस पर रहे क़ाइम जो दिल में ठान ली

“I must acknowledge the steadfast resolve of revered Akbar; till his dying breath, he remained true to whatever his heart resolved.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मैं हज़रत अकबर की दृढ़ता और अडिग संकल्प को स्वीकार करता हूँ, क्योंकि उन्होंने जो बात दिल में ठान ली थी, मरते दम तक उस पर क़ायम रहे।

विस्तार

यहाँ शायर हज़रत अकबर इलाहाबादी के अडिग इरादों और उनकी दृढ़ता की दिल से दाद दे रहे हैं। यह शेर उस इंसान की तारीफ़ करता है जो एक बार दिल में जो फ़ैसला कर ले, फिर ज़िंदगी की आख़िरी सांस तक अपने उसूलों से पीछे नहीं हटता। इसमें ज़माने के थपेड़ों के सामने झुकने के बजाय अपनी बात पर क़ायम रहने वाले अटल हौसले की बेहद खूबसूरत झलक है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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