मैं तो इंजन की गले-बाज़ी का क़ाइल हो गया रह गए नग़्मे हुदी-ख़्वानों के ऐसी तान ली

“I stand amazed at the vocal prowess of the engine’s throat; The camel-drivers’ songs fell mute before its soaring note.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मैं इंजन की आवाज़ और गायकी के हुनर का कायल हो गया हूँ, क्योंकि उसने ऐसी ऊँची तान छेड़ी कि ऊँट हाँकने वालों के गीत भी पीछे छूट गए।

विस्तार

अकबर इलाहाबादी ने इस शेर में पुरानी रवायत और आधुनिक मशीन युग के टकराव को बड़े ही चुटीले अंदाज़ में पेश किया है। सदियों से रेगिस्तान में ऊँट हाँकने वाले जो रूहानी गीत ('हुदी') गाते थे, रेलगाड़ी के इंजन की तेज़ गूँज और सीटी ने उस पूरे तरन्नुम को एक झटके में दबा दिया। इंजन की 'गले-बाज़ी' की तारीफ़ करके शायर असल में यह गहरा तंज़ कर रहे हैं कि कैसे नई तकनीक ने हमारी धीमी और सुकून भरी ज़िंदगी के मीठे नग्मों को ख़ामोश कर दिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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