આત્મ અનુભવે હોય પ્રકાશ
અખા અહં કાર તે પામે નાશ.
“By self-experience, light does shine,O Akha, the ego then will decline.”
— अखा भगत
अर्थ
आत्म-अनुभव से ही प्रकाश उत्पन्न होता है। हे अखा, इससे अहंकार का नाश हो जाता है।
विस्तार
कवि अखाजी का यह दोहा समझाता है कि सच्चा ज्ञान और प्रकाश अपने भीतर के अनुभव से ही उत्पन्न होता है। जब आप अपनी आत्मा को गहराई से समझते हैं, तो एक गहन आत्म-बोध होता है। यह आत्म-ज्ञान अहंकार को स्वाभाविक रूप से नष्ट कर देता है। इसका मतलब है कि जब आप अपनी वास्तविक पहचान को सतही धारणाओं से परे जान लेते हैं, तो गर्व और भ्रम से उपजा आपका 'मैं' का भाव स्वयं ही मिट जाता है। यह आत्म-खोज की एक यात्रा है जो आपको अहंकार की सीमाओं से मुक्त करती है और आपके वास्तविक स्वरूप को प्रकाशित करती है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
