किसी की रंजिश या शिकायत सुना नहीं सकता;पड़ी हैं बेड़ियाँ ऐसी कि खड़खड़ा नहीं सकता।
“I cannot make anyone hear a grievance or a plea;Such shackles have been cast, I cannot even rattle them free.”
— अमृत घायल
अर्थ
मैं किसी की रंजिश या शिकायत सुना नहीं सकता; ऐसी बेड़ियाँ पड़ी हैं कि मैं उन्हें खड़खड़ा भी नहीं सकता।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब इंसान खुद अपनी बेबसी का शिकार हो जाता है। शायर कह रहे हैं कि वह किसी की शिकायत सुन नहीं सकता, क्योंकि खुद पर ऐसी बेड़ियाँ हैं कि वह एक आवाज़ भी नहीं निकाल सकता। यह बेड़ियाँ सिर्फ़ ज़ंजीरें नहीं हैं, ये ज़िम्मेदारियाँ हैं, ये हालात हैं... जो हमें अपनी ही ज़ुबान पर ताला लगा देते हैं।
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