निरंतर पिलाता है कोई, निरंतर पीता हूँ मदिरा, परंतु जाम से जाम टकरा नहीं सकता हूँ।
“Someone incessantly offers, I incessantly drink wine, But I cannot clink my glass with another's glass.”
— अमृत घायल
अर्थ
कोई मुझे लगातार पिला रहा है और मैं लगातार शराब पी रहा हूँ, परंतु मैं किसी और के साथ अपना जाम नहीं टकरा सकता। यह बिना किसी साथी के लगातार और अकेले शराब पीने की भावना को दर्शाता है।
विस्तार
यह शेर उस मीठी सी तकलीफ को बयां करता है जो हमेशा साथ रहती है। शायर कह रहे हैं कि कोई लगातार जीवन की मदिरा पिलाता रहता है, और हम भी पीते रहते हैं, लेकिन कभी भी उन जामों को आपस में टकरा नहीं पाते। यह उस रिश्ते की बात है जहाँ कोशिश तो बहुत है, पर वो आखिरी मुलाकात, वो पूरा होना, कभी नसीब नहीं होता।
