उसे खबर तक नहीं है, भीतर कैसी आग जलती है! रिसती चाँदनी में बेफिक्र हो, नहाता है दरिया।
“It doesn't even know, what fire burns within! The sea, carefree, bathes in the flowing moonlight.”
— अमृत घायल
अर्थ
इस छंद में बताया गया है कि किसी को अपने भीतर जल रही तीव्र अग्नि या संघर्ष का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं है। बाहर से वह शांत और बेफिक्र दिखाई देता है, जैसे दरिया चाँदनी में सुकून से नहा रहा हो।
विस्तार
यह शेर अंदर के संघर्ष और बाहर की शांति का अद्भुत संगम है। शायर कहते हैं कि दुनिया, चाँदनी और दरिया की तरह बेफ़िक्र होकर बह रही है, लेकिन अंदर कहीं कोई आग जल रही है—जिसे किसी ने देखा नहीं। यह उन गहरे दर्द को बयां करता है जिसे हम अक्सर दुनिया को दिखाने से पहले खुद ही छुपा लेते हैं। यह एक बहुत ही ख़ूबसूरत तन्हाई का एहसास है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
