प्रभु जाने, गया है चाँदनी में क्या ऐसा देखा!कि उसके द्वार पर, सागर खड़ा सूख रहा है!
“God knows, what did he witness in the moonlight's gleam!That at his door, the ocean stands and dries, it would seem!”
— अमृत घायल
अर्थ
प्रभु जाने, चाँदनी में उसने ऐसा क्या देखा है कि उसके द्वार पर सागर खड़ा सूख रहा है।
विस्तार
यह शेर एक अद्भुत, कल्पनाशील मंजर पेश करता है। शायर कह रहे हैं कि चाँदनी में जो कुछ देखा गया, वह इतना गहरा, इतना विस्मयकारी था... कि उस नजारे के सामने पूरा सागर ही थम गया, सूखने लगा। यह किसी ऐसे पल का एहसास है जब कोई अनुभव इतना बड़ा होता है कि वह प्रकृति के नियम को भी चुनौती देता है।
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