ज़ुल्फ़ें ये कम न थीं ज़रा भी महक में, मूर्ख थे हकीम जो इत्र तक गए।
“Her tresses weren't lacking fragrance, not at all, Foolish were hakeems, who sought attar's call.”
— अमृत घायल
अर्थ
उसकी ज़ुल्फ़ों में ख़ुशबू की ज़रा भी कमी नहीं थी; हकीम मूर्ख थे जो इत्र की तलाश में गए।
विस्तार
ये शेर एक बहुत गहरी बात कहता है, कि जो चीज़ें स्वाभाविक रूप से खूबसूरत होती हैं, उन्हें किसी बाहरी चीज़ की ज़रूरत नहीं होती। शायर कह रहे हैं कि ज़ुल्फ़ों में महक अपने आप थी, उन्हें किसी इत्र की ज़रूरत नहीं थी। यह उन लोगों पर एक तंज़ है जो चीज़ों को ज़्यादा जटिल बना देते हैं, और यह याद दिलाता है कि असली सुंदरता अपने आप में काफी होती है।
