फंगोलती फिरती है गगन! रात तो देखो!मथती रहती है गगन! रात तो देखो!
“Tossing, it wanders the heavens; behold the night!It keeps churning the sky; behold the night!”
— अमृत घायल
अर्थ
रात को आकाश में उछलते और घूमते हुए दर्शाया गया है। वह लगातार आकाश को मथती रहती है; रात की इस गतिविधि को देखो।
विस्तार
यह शेर प्रकृति की एक अद्भुत तस्वीर पेश करता है, जो एक गहरी तड़प के नज़ariye से देखी गई है। अम्रुत घायल जी कहते हैं कि गगन को देखो—वह कैसे लहरों की तरह हिल रहा है। रात का ये आसमान, अपनी रहस्यमयी हलचल से, दिल के उन गहरे, अनकहे जज़्बातों को दिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि कुछ एहसास होते हैं जिन्हें हम बस देख सकते हैं, उन्हें समझने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
