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करने ही कहाँ देती है गमन! रात तो देखो!गुंज़लूँ बन पड़ा है पवन! रात तो देखो!

Where does it even let one depart! Just look at the night!The wind has curled up and fallen! Just look at the night!

अमृत घायल
अर्थ

यह रात किसी को जाने ही कहाँ देती है। रात की खामोशी तो देखो, हवा भी सिमटकर शांत पड़ गई है।

विस्तार

ये शेर उस वक़्त की बात करता है जब दिल बहुत ज़्यादा बेचैन होता है। शायर कह रहे हैं कि न रात का अंधेरा है, न हवा का चलना.... सब कुछ इतना गुंफला और बेताब है कि कहीं भी जाने की हिम्मत नहीं होती। यह सिर्फ़ प्रकृति का वर्णन नहीं है, बल्कि अंदर के तूफ़ान को बयां करना है जो हमें कहीं भी रुकने पर मजबूर कर देता है।

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