अब तो दृष्टि केवल सादगी को खोजती है, गया वह दौर जब रहती थी दमाम तरफ।
“Now my gaze only seeks simplicity, Gone are those days it was drawn to grandeur.”
— अमृत घायल
अर्थ
अब मेरी दृष्टि केवल सादगी को खोजती है, वह दौर चला गया जब यह भव्यता की ओर आकर्षित होती थी।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे बदलाव को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि हमारी नज़रों को अब वो चमक-दमक नहीं चाहिए जो पहले चाहिए थी। अब हमें सादगी में सुकून मिलता है। यह एहसास कि जीवन की असली खूबसूरती दिखावे में नहीं, बल्कि सादगी में है, कितनी गहरी बात है! यह एक तरह से परिपक्वता की बात है।
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